Monday, October 31, 2011

बहु की विदा

-“हम बहू को विदा कराके नही ले जाएगे”। लड़के के बाप ने कलेवा के बाद घोषणा कर दी।
-“क्यों भाईसाहेब? क्या कमी रह गई हमसे”? लड़की का माँ विनयवत होकर पूछी।
-“आप लोगों ने हमारी नाक कटा दी। कलेवा मे आपने सभी बारातियों को चाँदी के सिक्के नही दिये”।
-“लेकिन 151 रुपए के लिफाफे तो दिये न”।
-“हाँ, लेकिन कलेवा मे चाँदी के सिक्के दिये जाते हैं, इतना भी आपको नही पता। कैसे आपने अपनी और लड़कियों की शादी की है? क्या पहली बार कायस्थों मे शादी कर रही है”?
-“लेकिन पिता जी, आपने जो-जो रस्में जैसे-जैसे निभाने को बतायीं थी, वैसे ही तो निभाया गया है”। अब लड़की के भाई ने मोर्चा संभाला।
-“तो क्या अपना दिमाग नही लगाना चाहिए? कैसे कायस्थ हो”?
-“अब आपने तो मिठाइयों के नाम के साथ मिठाई की दुकान का नाम भी बता दिया था तो इतनी महत्वपूर्ण बात आप कैसे भूल गए”?
-“हमसे जबान मत लड़ाओ। हमारी नाक कटवा दी, हम लड़की विदा कराके नही ले जाएँगे”।
-“तो हम आपको भी विदा नही करेंगे। आपका यहाँ स्वागत है, जितने दिन यहाँ रहना चाहे, यहाँ रहे, आपके खाने-पीने का पूरा इंतेजाम यहाँ रहेगा”। लड़की के भाई ने भी विनयपूर्वक लेकिन दृढ़ शब्दों मे लड़के के पिता को सुना दिया। कुछ ही देर मे वेडिंग पॉइंट के दरवाजे बाहर जाने के लिए बंद हो गए और हलवाई लड़के के पिता से पूछने आ गया कि “बाबू जी दिन के खाने मे क्या पसंद करेंगे”? कुछ देर मे ससुराल पक्ष वाले खुद ही लड़के के पिता को समझाने लगे और माननीय लड़की की विदा को तैयार हो गए। विदा के समय लड़के के मामी खुसुर-फुसुर कर रही थी कि ये शादी लंबे समय तक याद रहेगी और उधर लड़की अपनी माँ से लिपट के रो रही थी “ये लोग मुझे वहाँ परेशान तो नही करेंगे” और माँ उसे सांत्वना दे रही थी “तुम धैर्य रखना, कुछ दिन मे सब सामान्य हो जाएगा”।

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