Monday, October 31, 2011
फेसबुक आन्दोलन
· आज दिन खर्चीला बैठा लेकिन कई काम बड़ी सहूलियत से हो गए मसलन बिजली के बिल की रीडिंग ही ठीक करवानी थी लेकिन लाइनमैन को दो सौ रुपये देकर काम घर बैठे मोबाइल पर ही हो गया। हिसाब लगाता हूँ तो दो सौ रुपये तो दो दिन दौड़ने मे ही फुक जाते और समय बर्बाद होता सो अलग, इसलिए दो सौ रुपये चुपचाप लाइनमैन को देकर काम निकलवाना कोई बुरा सौदा तो नही था। अब जाकर शाम को फुर्सत मिली है, सोचता हूँ अन्ना हज़ारे को फेसबुक या मोबाइल पर से ही समर्थन दे दूँ।
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