· मैं उसके दुकान पे कभी-कभी चाय पीने जाया करता था। वो एक मोटी सी चोटी सिर पे बांधता था और चभियों का गुच्छा उसके जनेऊ मे लटकता था। नाम था उसका “अवधेश सिंह पंडित”। कुछ दिनों बाद ओ बी सी कोटे से उसकी भर्ती कांस्टेबल के पद पे हो गई। तब उसका पूरा नाम पता चला “अवधेश सिंह पंडित यादव”।
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