Monday, October 31, 2011
लातों के भूत
· वो जैसे ही चाट के ठेले पे आई, कई जोड़ी आंखे उसका एक्स रे लेने मे तत्पर हो गई। उसकी शख्सियत भी कुछ अजीब सी थी, एक अजब सी बेफिक्री चाल-ढाल मे जैसी निचले तबके के नौजवानों मे प्रायः देखने को मिलती है। अगर उसके जेवरों को अलग कर दिया जाता तो पहनावा भी वैसा ही था, चुस्त जींस, ढीली सी टी-शर्ट और उन पर बेतरतीबी से उड़ते बाल। आखिर कुछ मनचलों से रहा न गया और छेड़खानी कर ही दी। अचानक बिजली सी चमकती फुर्ती से उस लड़की ने अंगीठी से गरम सलाख खींच कर उन लड़कों पे तान दी। अब वो साक्षात दुर्गा रूप मे “पूजनीय” थी।
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