Monday, October 31, 2011

भेड़िये

· एक नैतिक युवा नया-नया अफसर बना। जिन लोगों ने लिए जाने वाले ऋण के सापेक्ष वस्तुओं का क्रय नहीं किया था, उनकी ऋण अनुदान की फाइलें उसने रोक दीं। उसके अफसरों ने उसे टारगेट पूरा न होने पर उसकी चरित्र प्रविष्ठि पर लाल बिन्दु अंकित होने का भय दिखाया तो उसने दबाव में आकर वो फाइलें निस्तारित कर दीं। सायंकाल उसका हिस्सा उसके घर पहुँच गया। भ्रष्टाचारी भेड़ियों की जमात में एक संख्या और बढ़ चुकी थी।

No comments:

Post a Comment