Sunday, October 30, 2011
अट्टालिका
अट्टालिका तैयार हो रही थी। वो किशोर भाई वहाँ दिन मे मजदूरी और रात मे चौकीदारी करते थे। देर शाम को वही पे ईंटों का चूल्हा बनाकर एक भाई रोटियाँ बेलता जाता था और एक सेंकता जाता था। जिस दिन ठेकेदार मजदूरी दे देता था, शाम को रोटी के साथ सब्जी भी बन जाती थी वरना तो प्याज और मिर्च के साथ कुटा नमक ही क्षुधापूर्ति का साधन बनता था। कुछ भी हो लेकिन थे दोनों बहुत संतुष्ट। और एक दिन जब अट्टालिका बनकर बिकने को तैयार हो गई तो लोगो ने दो भाइयों मे जबरदस्त झगड़ा देखा। वे दोनों उस अट्टालिका के मालिक थे।
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