Monday, October 31, 2011

नमक की कीमत

· उस बड़े शहर के छोटे से मकान मे वो बुजुर्ग दंपत्ति अपने जीवन का अंतिम पड़ाव भुगत रहे थे। रिश्तो के लिए मरुस्थल बन चुके उस शहर मे उनके पास रिश्तों के नाम पर मात्र एक विश्वासपात्र नौकरानी थी। एक और भी रिश्ता था उनका, उस कुत्ते के साथ, जिसको वो रात का बचा खाना दिया करते थे। एक दिन वो अपने मकान मे मृत मिले। उनको देखने वालों के हुजूम मे वो विश्वासपात्र नौकरानी भी थी। उस पर कुत्ता लगातार भौंक रहा था। वो अभी नमक की कीमत अदा करना भूला नहीं था।

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