Sunday, October 30, 2011

खूनी पुरवा

कथावाचक : नाम- श्री शैतान सिंह, पुरवा- खूनी पुरवा , ग्राम- झगड़ गाँव, पोस्ट- बदनामपुरी , तहसील- गदरपुर, जिला- ऊधमसिंह नगर।
नोट- ये कथा कथावाचक ने उसके नाम-पते मे खतरनाक शब्दों के हरबेरियम होने पर उठी मेरी जिज्ञासा को शांत करने के लिए सुनाई थी।
तो लल्लन के दादा अपने खेत मे खुश-खुश खड़े थे सो मेरे बुड्ढे के पेट मे हुड़क उठी। बड़ा खुश दिख रिया है, लुगाई ने आज सुबह-सुबह खाने मे क्या दे दिया? अरे आज खेत मे गन्ना बोऊँ हूँ। बस उसकी खुशी से मेरे बुड्ढे की खोपड़ी सटक गई। गन्ना तो बो लेगा, लेकिन जाएगा किधर को ले के। तेरे खेत की मेड़ से होके ही जावूंगा। अब तक उसकी भी खोपड़ी सटक चुकी थी। ले जा के दिखइयो। ले अभी ले जा के दिखा रिया हूँ। ये देख, मैंने गन्ने बोये और उसने कुछ सीके रोप दी। अब मैंने उन्हे काटा और उन सीकों को उसने उखाड़ दिया। अब मैंने उन्हे अपने ट्रैकटर पर लादा और उसने सीकों को अपनी लाठी पर रख दिया। ये देखो मेरा ट्रैकटर चालू हुआ घ ड़ ड़ और ये पहुंचा तेरी मेड़ पर। और उसकी लाठी ने मेरे खेत की मेड़ छूयी और इधर मेरे बुड्ढे की लाठी उसके सिर पर। फिर तो गाँव मे कई मरे और घायल हुए। तो डागडर बाबू हमारा इलाका तो ऐसी ही कहानियों से भरा पड़ा है। अब तुम ही बोलो हमारा नाम-पता सही है या नही।
(पुनश्च- किसी भी आलोचना से पहले नाम-पते पे फिर गौर फ़रमा ले)

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