Sunday, October 30, 2011

सहयात्री

बस के माहौल मे बहुत उमस थी। उस पर से बस की धीमी रफ्तार लोगों को बुरी तरह से चिढ़ा रही थी। अचानक दो जवान लड़कों मे सिगरेट को लेकर आपस मे झगड़ा शुरू हो गया। “आपको पता नही बस मे धूम्रपान वर्जित है, सिगरेट फेंकिए”।
“लीजिये फेंक दी, अब चैन पड़ गया”।
सभी लोगों का ध्यान उनकी तरफ मुड गया और लोग अपनी-अपनी खीझ भूलकर उनकी तरफ उत्सुकता से मुखातिब हो गए।
“फेंक दिया तो कोई एहसान नही कर दिया, ये तो गैरकानूनी था ही”।
“बड़े आए कानून सिखाने वाले, खुद तो मुह से शराब की बदबू आ रही है”।
“बस मे पीकर बैठना गैरकानूनी नही है, अगर मैं बस मे पीता तो गैरकानूनी होता”।
“ हुंह! सूप बोले तो बोले, चलनी बोले जिसमे बहत्तर छेद”।
उनकी ऐसी रोचक बातों से लोगों का खासा मनोरंजन हो रहा था और लोग बड़े चाव से उनकी बहस सुन रहे थे। कुछ अतिउत्साही किस्म के लोग तो उनकी बहस मे शामिल भी हो गए। कुछ देर बाद बस का स्टापेज आ गया और वो दोनों जवान लड़के एक दूसरे के गरदन मे बाहें डाल कर हसते हुए बस से बाहर उतर गए।

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