Sunday, October 30, 2011

गुप्ता चाट भंडार

गुप्ता जी ने चाट की अपनी तीसरी दुकान पुरानी दुकानों के बगल मे ही खोली और नाम रखा “असली गुप्ता चाट भंडार”। मैंने पूछा “ ये क्या गुप्ता जी, “गुप्ता चाट भंडार”, “पुराना गुप्ता चाट भंडार” और अब “असली गुप्ता चाट भंडार”? वो बोले “अरे भाई, कभी किसी बड़े मंदिर मे गए है तो वहाँ कितने गणेश जी या बजरंगबली या शिवलिंग पाते है”? मैंने कहा “तीन-चार तो होते ही है”। उन्होने फिर पूछा- किसलिए? मैंने कहा पता नही तो उन्होने बताया कि “अरे कही तो श्रद्धा जागेगी और जेब से पैसा निकलेगा। तो इसीलिए दुकाने मेरी ही है और नाम भी एक जैसा, नाम के चक्कर मे आदमी किसी दुकान पे तो गिरेगा ही”।

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