Monday, October 31, 2011

मन का माइग्रेन

कल उसके सास-ससुर आए थे। उसने उनका पूरा सत्कार किया लेकिन पूरे समय माइग्रेन के कारण उसका मुंह ऐसा लटका था कि यदि कोई उससे कोई फरमाइश अपने मन से करता तो वह स्वयं आत्मग्लानि से भर जाता। उसके सास-ससुर रात ही वापस लौट गए थे। अजब संयोग था कि उसी रात उसके माता-पिता मिलने आ गए थे। अब वो चहकती हुई उनका स्वागत- सत्कार कर रही थी। माइग्रेन गायब हो चुका था।

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