Monday, October 31, 2011

मनुष्यत्व

सुबह-शाम खाना देने के कारण दो कुत्ते अक्सर मेरे दरवाजे पे ही रहते थे। किसी दूसरे कुत्ते को उधर रहने देना तो दूर, क्या मजाल कि कोई दूसरा कुत्ता उनकी रोटी सूंघ भी ले! कल सुबह एक पिल्ला घूमता-फिरता उधर आ गया। वे दोनों उस पिल्ले पे बुरी तरह भौंके। जवाब मे वो पिल्ला अपनी पूंछ दबा कर कूँ कूँ करने लगा। वे दोनों चुप हो कर बैठ गए। पिल्ला भी उनसे थोड़ा हटकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद जब मैंने रोटी फेंकी तो वो पिल्ला भी कूँ कूँ करते हुए रोटी के पास आ गया। फिर वे दोनों बिना रोटी खाये कहीं चले गए और अभी तक वापस नही आए। उन कुत्तों के इस गुण को क्या कहेगें “श्वानत्व (कुत्तत्व)” या “मनुष्यत्व”?

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