Thursday, January 13, 2011

संक्रांति की शुभकामनाएं

संक्रांति (खिचडी) का पर्व मुझे प्रिय है क्योंकि यह पर्व दो विपरीत परिस्थितियों (शीत- ग्रीष्म, काली उरद- सफ़ेद चावल, कडवे तिल- मीठा गुर) का मिलन बिंदु है और यह पर्व हमें इन विपरीत परिस्थितियों को भी आनंद के साथ मनाने का अवसर प्रदान करता है। हम जबरदस्त विरोधाभासों के बीच जीते है। यह विरोधाभास हमारे भीतर प्रेम- घृणा, सुख-दुःख जैसे मनोभावों के रूप में है और अमीरी-गरीबी, शिक्षित- अशिक्षित जैसे रूपों में बाहर भी। लेकिन
हमें इन अंतर्द्वंदों के बीच ही आनंद के साथ जीना है और यही सीख अगली पीढ़ी को भी देना है। सर्वे भवन्तु सुखिनः के भावों के साथ आप सबको पुनः संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।

Wednesday, January 5, 2011

क्षणिकाए

रिश्तो में अब हम व्यापारी होने लगे,
क्या दिया और क्या पाया,
हिसाब अंगुलियों पे लगाने लगे ।

रिश्ते अब सिकुड़ते जा रहे है,
कंट्रोल्ड computerized रिश्तो के अन्दर,
क्योंकि वहाँ कोई टोक नहीं सकता,
चस्पा झूठी मुस्कराहट पर।

बच्चे को अपने
सारी दुनिया समझाने की मुझे थी फ़िक्र
लेकिन कल मैं शर्मिंदा था,
जब उसने किया,
दादा- दादी क्या होते हैं,
इसका मासूम सा जिक्र।

Sunday, December 26, 2010

गुजरे साल का इंडिया से रिश्ता: शेरों पर सवा शेर

२०१० बीता जात हैऔर
मंहगाई डायन खात जात है।

शशि थरूर और ललित मोदी की ट्वीट
मुन्नी बदनाम और शीला की जवानी स्वीट।

रिसेशन पर मनमोहन बजा रहे है धुन
लेकिन प्याज टमाटर दबा कर शरद पवार है टुन्न।

सचिन बना रहे है शतको पर शतक
दूसरे खेलो में भी जीते जा रहे है पदक।

धोनी और सानिया के घर बजी बीते साल शहनाई
सहवाग के पप्पा बनने पर भी हम सबकी बधाई।

याद रहेगा मिशेल- ओबामा का भारत आना
और चीन- पाकिस्तान अलाप रहे वही राग पुराना।

मिशन चन्द्रमा ने खोजा चंदा पर पानी
पर जी एस एल वी F-६ और डी-३ हुए बेमानी।

नीरा रादिया, कलमाडी और राजा
तीनो मिलकर बजा रहे है शाइनिंग इंडिया का बाजा।

बिहार में नीतीश की साईकिल बढ़त जात है
और लालू की लालटेन भुकभुकात है।

मौलाना मुलायम और आजम अब एक है
और तिवारी जी अभी भी दिल फेक है।

टी वी पर भी है अजब घालमेल
राखी सावंत इन्साफ बाट रही और सीधी बात फेल।

2 जी, Common वेल्थ घोटाले आदर्श है
२०१० अघोषित घोटाला वर्ष है.

Wednesday, December 22, 2010

आधुनिक परिवार

हमारे मोहल्ले में आज- कल एक घटना राष्ट्रीय चैनलों पर सुर्ख़ियों में है। एक पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर लाश डीप फ्रीज़र में दो महीने तक रखी और उसके टुकड़े- टुकड़े कर ठिकाने लगता रहा, जबकि इस बीच अपने लगभग चार साल के जुड़वाँ बच्चों से उसका व्यवहार सामान्य बना रहा। इस घटना का पता अगल- बगल, माकन-मालिक तक को नहीं लगा। ऐसी घटनाये हमें सचेतती है कि अब हमें पुनः अपने सामाजिक रिश्तो को जीवंत रूप में जोड़ना पड़ेगा, न कि केवल फेसबुक और आर्कुट जैसे डिजिटल रूप में। नहीं तो पता नहीं कितने नर पिशाच इन कंक्रीट के जंगलों में पैदा होकर मानवता का खून करेंगे.

Tuesday, November 24, 2009

रिश्ते और रुपैया

ऊपर से देखने पर रिश्ते और रुपैया में अनुप्रास अलंकार के अलावा कोई समानता नही दिखाई पड़ती लेकिन आज की भौतिक दुनिया में इसकी भी बहुत अहमियत है। भूखे नग्नो के न तो यार दोस्त होंगे न ही रिश्तेदार और किसी रसूख वाले को देखिये तो वह आदमियों से ही घिरा होगा। भाई लोग उस से कुछ नही तो उस से उसके रिश्तेदार के पड़ोसी होने का ही रिश्ता जोड़ लेंगे और जब तक आप आठ- दस आदमियों से घिरे न रहे तब तक तो आपकी जिन्दगी समझिये चिल्लरों वाली ही है जिसे आज-कल भिखारी भी नही पूछते। तो जनाब बैठे क्यों है, जाइए और कुछ रुपैया इक्कट्ठा करिए ताकि आप भी रिश्तो का सुख ले सके।

Thursday, November 19, 2009

डॉक्टर

एक अनोखा रिश्ता है मरीज और डॉक्टर के बीच ।मेरा पुत्र बहुत बीमार था और कई दिनों से मई उसे कई चिकित्सको को दिखा चुका था लेकिन कोई फ़ायदा नही मिल रहा था। ऐसे में एका -एक मुझे अपने नारायण बागढ़ के डॉक्टर पाठक याद आए। मैंने उनेहे बिना किसी झिझक के फ़ोन किया। उन्होंने फ़ोन पर ही दवाएं बताई और मेरा बेटा आज ठीक है और स्कूल भी गया। ऐसे चिकित्सकों को मेरा सलाम। धन्यवाद डॉक्टर पाठक!