70-किस नाम से पुकारूँ उन्हे? ही मैन ..................... नही नही सुपर मैन...................... नही ये भी जंच नही रहा है...................हाँ वो टी वी का विज्ञापन क्या है...................हाँ माचो मैन। हाँ तो हमारे मिस्टर माचो मैन कल मंडली मे अपनी मर्दानगी के किस्से बखान रहे थे कि कितनी महिलाओं के संग उनके अंतरंग संबंध रहे है और अपने इन दावों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने के लिए विभिन्न नस्ल की महिलाओं के खास अंगो की कुत्सित व्याख्या कर रहे थे। आज बड़ा आश्चर्य हुआ कि मिस्टर माचो मैन ने अपने परिवार की करवा-चौथ वाली तस्वीरें फेसबुक पे अपलोड की थी। अब उनके लिए क्या नाम उपयुक्त होगा............?
71-कुछ दिन पहले जब वह कहीं स्कूटर से जा रहा था तब उसने एक बाइक और साइकिल वाले की जोरदार टक्कर देखी थी, जिसमे दोनों ही जख्मी हुए थे लेकिन उस समय वह बिना रुके ही आगे बढ़ गया था। एक-दो दिन पहले भी जब पिता का फोन आया था कि “बहुत दिनों से घर नही आए हो आ जाओ”, तो भी उसने बच्चों के स्कूल के नाम पर पिता को टाल दिया था। आज बस मे एक प्रौढ़ महिला जब उसकी सीट के बगल मे खड़ी हुई तो उसने आंखे बंद कर ली ताकि उसे खड़ा न होना पड़े। आंखे बंद करने पर उसे अजीब सा एहसास हुआ कि वो धीरे-धीरे एक बोन्साई बनता जा रहा है।
72-गरीबदास अपनी निर्धनता से पीड़ित था। अपनी दशा से दुखी होकर दीपावली की रात उसने कातर स्वरों से माँ लक्ष्मी की आराधना की। माँ द्रवित होकर उसके सड़क किनारे पड़े सीवेज पाइप वाले निवास स्थान मे प्रकट होकर बोली “बेटा, मांगो क्या मांगते हो”? वो ऐसे चमत्कार के लिए तैयार न था अतः बौखलाहट मे मांग कर बैठा “माँ, मेरा ये घर स्वर्णाभूषणों से भर दो”। माँ ने कहा “मूर्ख, मांगना है तो अपनी औकात मे ही माँग”। लेकिन वो जिद कर बैठा, “माँ, मेरी यही इच्छा है, पूरी करना है तो करो नही तो रहने दो”। माँ ने कहा, “तथास्तु” और वो अंतर्ध्यान हो गयी। उसका निवास मे कनक वर्षा हुई और घर स्वर्णाभूषणों से भर गया। ऐसी बातें कहाँ छिपती है, जो अब छिपती सो अगले ही दिन उसके घर पे रेड पड़ गयी। पुलिस, आयकर, नगर-निगम सभी पहुँच गए। “ये आभूषण कहाँ से आए”, “इन्हे खरीदने के लिए पैसे कहाँ से आए”, “टैक्स जमा करते हो या नही”, “फार्म 16 दिखाओ”, “कहाँ से खरीदे”, “रसीद दिखाओ”, “इस पाइप मे क्यों रहते हो”, “भारत के नागरिक होने का सबूत दो”, “किस आतंकवादी ग्रुप से हो” आदि-आदि। वो गरीब क्या उत्तर देता और जो उत्तर भी दिया उस पर विश्वास कौन करता? बेचारा गरीबदास...............
73-कल डीएम साहब ब्लॉक के दौरे पर आए और सभी अधिकारियों के साथ एक बैठक की। हमारे बीईओ साहब (ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर) मीटिंग इत्यादि से घबराने वाले ठहरे, सो दो घूंट लगा ली और एबीईओ (असिस्टेंट ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर) को लेकर पहुँच गए मीटिंग मे। पीडबल्यूडी, बिजली और सिंचाई के बाद शिक्षा विभाग बड़ा ही महत्वपूर्ण महकमा है सो उनका नंबर भी जल्दी लग गया।
-हूँ, गावों मे स्कूलों को चेक करने जाते हो या यहीं बैठे-बैठे सब रिपोर्ट ओके है।
-जाता हूँ। क्यों, है न एबीईओ साहब?
-लेटेस्ट कहाँ गए थे?
-गन्ने के पुरवा मे। क्यों, है न एबीईओ साहब?
-स्कूल मे कितने कमरे थे?
-तीन या चार। क्यों, है न एबीईओ साहब?
-तीन या चार, ठीक-ठीक बताओ। गए भी थे या यहीं बैठ कर टूर रजिस्टर भर दिया?
-नही साहब। तीन! तीन ही कमरे थे। क्यों, है न एबीईओ साहब?
- ये “क्यों, है न एबीईओ साहब? है न एबीईओ साहब?” क्या लगा रखा है? तुम्हें पता होना चाहिए कि एबीईओ को?
-जी मुझे साहब।
-अच्छा वहाँ मिड डे मील की क्या पोजीशन थी?
-बढ़िया साहब। क्यों, है न एबीईओ साहब?
-मिड डे मील तुम्हारे सामने पका था?
-जी साहब। क्यों, है न एबीईओ साहब?
-कौन पका रहा था?
-ब्राम्हण साहब। क्यों, है न एबीईओ साहब?
-क्यो वहाँ भोजन माता कहाँ गई?
-साहब वो सवर्णों का गाँव है। भोजन माता निचली जात की है। क्यों, है न एबीईओ साहब?
- फिर! “क्यों, है न एबीईओ साहब? है न एबीईओ साहब?” क्या लगा रखा है? बॉस कौन है तुम या एबीईओ?
-मैं साहब। क्यों, है न एबीईओ साहब?
-तुम्हें पता है मिड डे मील योजना का उद्देश्य क्या है?
-जी साहब। स्ट्रेंथ बढ़ाना। क्यों, है न एबीईओ साहब?
-कैसी स्ट्रेंथ बढ़ाना?
- बच्चों की शारीरिक ताकत बढ़ाना। क्यों, है न एबीईओ साहब?
-क्यों न तुम्हें सस्पेंड कर दिया जाय? क्यों, है न एबीईओ साहब? डीएम किटकिटा कर बोला।
-साहब अब चार महीने रिटायरमेंट के बचे है। चार्ज तो एबीईओ साहब को ही मिलना है, तो वही सब काम देख रहे है। मैं तो अब अपनी पेंशन की फाइल दुरुस्त करवाने मे लगा हूँ। आगे जैसी आपकी इच्छा। क्यों, है न एबीईओ साहब?
Sunday, November 6, 2011
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