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एक समय की बात थी जब चांडाल चौकड़ी के सितारे बुलंदियों पर थे। उस समय जब वो आसमान मे विचर रहे थे तब उन्हे सपने मे भी गुमान न था कि कभी वो भी जमीन आयेंगे, लेकिन ये तो प्रकृति का शाश्वत नियम है कि कुछ भी स्थिर नही रहता तो उनके सितारे भी हमेशा बुलंदियों पे कैसे रहते? वक्त ने करवट ली और उनके सितारे भी गर्दिश मे आये और ऐसे आए कि वो जेल की चारदीवारी के भीतर पहुँच गये। कभी जिनको देखकर नाक-भौं सिकोड़ा करते थे, उनके साथ ही लाइन मे सूखी रोटी के लिए खड़ा होना पड़ा। ज्यादा चूँ-चपड़ करने पर लाइन मे पीछे खड़े लोग हाथ-पैर तोड़ने को बेकरार रहते है। वक्त-वक्त की बात है।
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पिंकी चार भाइयों के बाद पैदा हुई खानदान मे इकलौती बेटी थी सो सबकी लाड़ली भी बहुत थी। मजाल कि उसके मुँह से निकली कोई बात मानी न जाए। रहन-सहन सब ऐसा, जैसे कोई राजकुमारी। फिर चाहे वो खिलौने हो या कपड़े सब एकदम अलग और यूनीक। लेकिन आज मेले से लौटने के बाद से ही उसका मुँह फूला हुआ था। बहुत कुरेदने पर वजह मालूम हुई, उसके जैसा सूट टोले की रज़िया भी पहन कर मेले मे घूम रही थी।
Sunday, November 6, 2011
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