Thursday, January 13, 2011

संक्रांति की शुभकामनाएं

संक्रांति (खिचडी) का पर्व मुझे प्रिय है क्योंकि यह पर्व दो विपरीत परिस्थितियों (शीत- ग्रीष्म, काली उरद- सफ़ेद चावल, कडवे तिल- मीठा गुर) का मिलन बिंदु है और यह पर्व हमें इन विपरीत परिस्थितियों को भी आनंद के साथ मनाने का अवसर प्रदान करता है। हम जबरदस्त विरोधाभासों के बीच जीते है। यह विरोधाभास हमारे भीतर प्रेम- घृणा, सुख-दुःख जैसे मनोभावों के रूप में है और अमीरी-गरीबी, शिक्षित- अशिक्षित जैसे रूपों में बाहर भी। लेकिन
हमें इन अंतर्द्वंदों के बीच ही आनंद के साथ जीना है और यही सीख अगली पीढ़ी को भी देना है। सर्वे भवन्तु सुखिनः के भावों के साथ आप सबको पुनः संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।

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