Tuesday, November 24, 2009
रिश्ते और रुपैया
ऊपर से देखने पर रिश्ते और रुपैया में अनुप्रास अलंकार के अलावा कोई समानता नही दिखाई पड़ती लेकिन आज की भौतिक दुनिया में इसकी भी बहुत अहमियत है। भूखे नग्नो के न तो यार दोस्त होंगे न ही रिश्तेदार और किसी रसूख वाले को देखिये तो वह आदमियों से ही घिरा होगा। भाई लोग उस से कुछ नही तो उस से उसके रिश्तेदार के पड़ोसी होने का ही रिश्ता जोड़ लेंगे और जब तक आप आठ- दस आदमियों से घिरे न रहे तब तक तो आपकी जिन्दगी समझिये चिल्लरों वाली ही है जिसे आज-कल भिखारी भी नही पूछते। तो जनाब बैठे क्यों है, जाइए और कुछ रुपैया इक्कट्ठा करिए ताकि आप भी रिश्तो का सुख ले सके।
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