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Monday, October 31, 2011
कंजूस का धन
· वो अकेला प्रौढ़ विधुर बहुत कंजूस था। कंजूसी के कारण रिश्तेदार भी उसके पास नहीं आते थे। पूछने पर कहता था कि बुढ़ापे मे जब हाथ-पैर नहीं चलेंगे तब ये पैसे काम आएंगे। एक दिन वो मर गया। रज़ाई-गद्दों से मिले लाखों रुपये के लिए उसके रिश्तेदार उसे कोसते हुए आपस मे लड़ रहे थे।
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