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Monday, October 31, 2011

अन्ना की टोपी

· विक्रम बेताल कथाबेताल के बोझ से लदे विक्रम हमेशा की भांति मौन थे। विक्रम की पीठ पर लदा बेताल उसी प्रकार आमोद-प्रमोद करते हुए चर्चा कर रहा था जैसे जनता की गाढ़ी कमाई पर मौज करते हुए नेता और बाबा लोग चर्चा करते है। तो आज बेताल ने कलियुग के उत्तरार्ध मे इंद्रप्रस्थ मे घटी अन्नालीला और उसके साक्षी रहे तीन व्यक्तियों “भोलूराम”, “मायाराम” एवं “चतुर राम” की कथा सुनाई। फिर बेताल ने पुलिसिया अंदाज़ मे विक्रम को डपटते हुए कहा कि इस घटना के बाद ये तीनों बिजली का कनेक्शन लेने बिजली के दफ्तर जाते है, वहाँ पर इन तीनों की क्रिया-प्रतिक्रिया सच-सच बताओ वरना थर्ड डिग्री देकर तेरे सर के टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा। विक्रम ने इनकी क्रिया-प्रतिक्रिया इस प्रकार बताई:भोलूराम ने जे ई से कहा कि मैंने प्रण किया है कि न घूस लूँगा न दूँगा। इस बात को सुनकर जे ई ने महीने भर इतना दौड़ाया कि पैरागान चप्पलें भी फट गई। उसके बाद भोलूराम ने 2000 रुपए देकर कनेक्शन लिया। मायाराम ने दफ्तर मे जाते ही जरूरती कागजों के साथ 2000 रुपए जे ई को सौपे और अगले दिन ही उसका कनेक्शन लग गया।चतुर राम ने दफ्तर मे पहुचने के बाद जे ई से मुस्करा कर अभिवादन किया और कलफ लगी सफ़ेद चमकती अन्ना टोपी सर पर ग्रहण की, फिर जरूरती कागजों के साथ 1000 रुपए जे ई को सौपे। अगले दिन ही उसका भी कनेक्शन लग गया और जे ई उसका चेला भी बन गया।