क्या कहा, खुद मुंसिफ पे ही इल्जाम है,
अहिस्ता बोलो, दीवारों के भी कान है।
लाख परदे में छिपाओ, सच तो खुलेगा,
क्या मुर्गे को छिपाने से सूरज नहीं उगेगा ।
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