औ काले को रंगीन
हमें दुनिया से क्या वास्ता
हम तो है सिर्फ तमाशाबीन।

लूटने वाला हमें कौन था,
हमारा रहनुमा या कोई रहगुजर,
हमें क्या खबर,हम तो ठहरे चिर बेखबर।

कविता को तूने सीढ़ी बनाया,
पहुचने को सत्ता के हरम में,
कविहृदय, माँ भी तेरी शर्मिन्दा होगी,
तेरे इस करम पे।


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