Wednesday, October 21, 2009

रिश्तों की फिसिओलोजी

रिश्तों के संसार में आज आपसे बातें करते है की मनुष्यों और मनुष्यों के बीच में रिश्ते कैसे बनते है, क्यों टूटते है और कैसे टिकते है?
रिश्ते कैसे बनते है?
कुछ रिश्ते जन्म से बनते है जैसे माँ- बाप, भाई- बहन इत्यादि। इन रिश्तों पर आदमी का कोई वश नही होता है। अगर यह रिश्ते सही ट्रैक पर चल रहे हो तो समझिये कि आदमी के पास कुछ नही होते हुए भी सब कुछ है और इसके ठीक विपरीत यदि यह रिश्ते ट्रैक से उतर गए है तो आदमी सब कुछ होते हुए भी कंगाल होता है। इन रिश्तो को एक शब्द में व्यक्त करने के लिए परिवार शब्द का उपयोग करना उचित होगा। कुछ लोग इसके लिए रिश्तेदार- नातेदार इत्यादि शब्दों का भी उपयोग करते है। इन रिश्तों में सिर्फ़ एक रिश्ता अपवाद स्वरुप है और वह है पति- पत्नी का, जो जन्म के समय से नही बनता है लेकिन जानकार कहते है कि यह रिश्ता सात जन्मों का होता है और सबसे ज्यादा समय तक साथ चलता है।
कुछ रिश्ते आदमी जन्म के बाद जैसे - जैसे बढ़ता जाता है , वैसे- वैसे बनाता जाता है जैसे दोस्त- दुश्मन, बॉस- मातहत, गुरु- चेला इत्यादि। यह रिश्ता मुख्यतः आदमी कुछ सीखने, कमाने अथवा प्राप्त करने के उद्दयेश से बनाता है। अगर आपके सीखने, कमाने अथवा प्राप्त करने के उद्दयेश में कोई बाधा बनता है तो वह स्वतः दुश्मनी के रिश्ते को प्राप्त कर लेता है।
रिश्ते क्यों टूटते है?
कोई चीज तभी टूटती है जब उनके बीच का सीमेंतिंग फैक्टर टूट जाता है। लेकिन इस सीमेंतिंग फैक्टर कि व्याख्या देश-काल-परिस्थितिओं के साथ बदलती है, फ़िर भी सर्वकालिक रूप से दूसरों के लिए प्यार, सम्मान, आदर, सरंक्षण, सहिश्रुनता और क्षमाशीलता का भाव रिश्तो के बीच सीमेंतिंग फैक्टर का काम करता है।
रिश्ते कैसे टिकते है?
कम शब्दों में कहना हो तो यही कहना पर्याप्त होगा कि सीमेंतिंग फैक्टर को मजबूत करिए तथा दूसरों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करिए,रिश्ते जीवन-पर्यंत चलेंगे।

1 comment:

  1. हिंदी में लेखन के लिए स्वागत एवं शुभकामनाएं

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