भारतीयों के पास रिश्ते ही रिश्ते होते है। हालाँकि मैं दुनिया नहीं घूमा हूँ लेकिन बड़े - बुढो से सुना है कि चाचा - चाची, मामा - मामी, बुआ-फूफा, दादा-दादी, नाना-नानी जैसे रिश्तो से दूसरे हाषा वाले मरहूम होते है। मसलन इंग्लिश में चाचा- चाची, मामा-मामी, बुआ- फूफा सबके लिए अंकल- आंटी ही है और दादा-दादी, नाना-नानी के लिए grandfather तथा grandmother ही है।
ऐसे में मै सोचता हूँ कि वे शादियों में पूर्वांचल में गायी जाने वाली गालियों का मज़ा भी नहीं जानते होंगे जैसे-
समधी मेरा आया
चुप रही, बस्स करी, ऐ राजा जी
भइया मेरा आया
मोटर भेजी, बस भेजी, ऐ राजा जी
लेकिन क्या ये रिश्ते अब भी वैसी ही मिठास लिए है जैसी हमारी स्म्रतियों में बसी है ?
इन्ही खट्टे- मीठे रिश्तो पर हम बाते करते रहेंगे। आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतेजार है।
आपका सिद्धार्थ
Wednesday, October 14, 2009
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