Tuesday, October 20, 2009

रिश्तो का संसार

बिना रिश्तों के मनुष्य का जीवन असंभव है। मनुष्य के पैदा होते ही अपने आप रिश्ते भी पैदा हो जाते है मसलन माँ- बाप, भाई- बहन, दादा- दादी, नाना-नानी इत्यादि। धीरे- धीरे आदमी बढ़ता है तो रिश्ते भी बढ़ते जाते है जैसे दोस्त- दुश्मन, बॉस- मातहत, पति-पत्नी, बेटा- बेटी, अडोसी-पड़ोसी, नेता जी-मंत्री जी इत्यादि-इत्यादि।
ऐसा नही है कि रिश्ते सिर्फ़ मनुष्यों से ही होते है। यह रिश्ते पशु- पक्षियों से भी बनते है जैसे गाय- भैंस, कुत्ता- बिल्ली, तोता- मैना। आपकी क्या मजाल जो किसी के कुत्ते को कुत्ता कह दे। इसी तरह रिश्ते पेड़-पौधों से भी बनते है। यदि आपके गमले से कोई बिना आपकी इजाजत के गुलाब तोड़ लेता है तो कितना बुरा लगता है।
रिश्ते निर्जीव वस्तुओं से भी बनते है। लेकिन यह रिश्ते कई बार हवस पैदा कर देते है और आदमियों के बीच रिश्ते तोड़ देते है।
इन्ही बातो के साथ आज कि बात समाप्त। नमस्कार।

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