Tuesday, November 24, 2009

रिश्ते और रुपैया

ऊपर से देखने पर रिश्ते और रुपैया में अनुप्रास अलंकार के अलावा कोई समानता नही दिखाई पड़ती लेकिन आज की भौतिक दुनिया में इसकी भी बहुत अहमियत है। भूखे नग्नो के न तो यार दोस्त होंगे न ही रिश्तेदार और किसी रसूख वाले को देखिये तो वह आदमियों से ही घिरा होगा। भाई लोग उस से कुछ नही तो उस से उसके रिश्तेदार के पड़ोसी होने का ही रिश्ता जोड़ लेंगे और जब तक आप आठ- दस आदमियों से घिरे न रहे तब तक तो आपकी जिन्दगी समझिये चिल्लरों वाली ही है जिसे आज-कल भिखारी भी नही पूछते। तो जनाब बैठे क्यों है, जाइए और कुछ रुपैया इक्कट्ठा करिए ताकि आप भी रिश्तो का सुख ले सके।

Thursday, November 19, 2009

डॉक्टर

एक अनोखा रिश्ता है मरीज और डॉक्टर के बीच ।मेरा पुत्र बहुत बीमार था और कई दिनों से मई उसे कई चिकित्सको को दिखा चुका था लेकिन कोई फ़ायदा नही मिल रहा था। ऐसे में एका -एक मुझे अपने नारायण बागढ़ के डॉक्टर पाठक याद आए। मैंने उनेहे बिना किसी झिझक के फ़ोन किया। उन्होंने फ़ोन पर ही दवाएं बताई और मेरा बेटा आज ठीक है और स्कूल भी गया। ऐसे चिकित्सकों को मेरा सलाम। धन्यवाद डॉक्टर पाठक!