Showing posts with label स्टोरी ऑफ़ गांधारी. Show all posts
Showing posts with label स्टोरी ऑफ़ गांधारी. Show all posts
Monday, October 31, 2011
जनचेतना
· राजमाता के पास बोलने की ताकत गिरवी रखने के कारण धृतराष्ट्र मौन थे। राजमाता ने भी आंखो पे पट्टी बांध रखी थी। दुर्योधन और दुःशासन अनर्गल प्रलाप कर रहे थे। लोकतन्त्र का चीरहरण हो रहा था। लेकिन लगता है कृष्णरूपी जनचेतना जाग चुकी है।
Subscribe to:
Posts (Atom)
